“गुड टच, बैड टच” बताने में आईएएस की पहल


जयपुर। बाल दुर्व्यवहार के संबंध में जागरूकता बढ़ाने के मद्देनजर आईएएस अधिकारी नवीन जैन ने एक नई पहल ‘स्पर्श’ का शुभारम्भ किया। जयपुर के पास चौमूं में 5 टीमों ने 20 सत्रों में 11 स्कूल कवर किए जिनमें लगभग 4500 विद्यार्थी और 50 शिक्षक शामिल थे। नवीन जैन के नेतृत्व में स्वयंसेवकों की एक समर्पित टीम जिसमें शिक्षाविदों, सेवानिवृत्त उच्च रैंकिंग वाले सरकारी अधिकारियों, युवा कामकाजी पुरुषों और महिलाओं की समर्पित टीम ने अपने व्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर विद्यार्थियों को संवेदनशील बनाने पर बातचीत और अन्य प्रासंगिक सामग्री भेंट की व प्रस्तुतियां दीं।
कौशल, रोजगार और उद्यमिता विभाग के सचिव तथा राजस्थान कौशल और आजीविका विकास निगम के अध्यक्ष नवीन जैन ने इस पहल की प्रेरणा के बारे में बताया कि ‘बेटियां अनमोल हैं’ (बेटी बचाओ) पहल के बाद मैंने इस एक नई पहल (बाल शोषण के विरुद्ध) को मौका देने का सोचा। हमारे देश में पिछले कुछ महीनों में इस खबर ने भी मुझे इस कदम की ओर झुकाया। कम से कम हम जो भी कर सकते हैं जितनी जल्दी हो सके, इस बाल छेड़छाड़ के खतरे से लडऩे के लिए करना चाहिए। मुझे और अधिक दिलचस्पी तब हुई जब मुझे समान चिंता वाले लोग मिले और वह उत्सुकता से मेरे साथ जुडऩे को तैयार थे। यह अभियान 6-14 वर्ष के आयु वर्ग के स्कूली लड़कों और लड़कियों के लिए है, क्योंकि यौन शिकारियों के लिए सबसे कमजोर यही हैं क्योंकि वे अच्छे स्पर्श और बुरे स्पर्श के बीच अंतर के बारे में नहीं जानते हैं।


जैन ने कहा कि चौमूं के स्कूलों में शिक्षकों को भी यह सिखाया गया कि कैसे बच्चों को अपने आसपास के लोगों द्वारा अच्छे या बुरे स्पर्श के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। इस आयु वर्ग के बच्चे स्पर्श के बारे में नहीं समझते हैं और इसलिए उन्हें इस बारे में सिखाया जाना जरूरी है। इससे पहले पिछले हफ्ते हमने इस पहल के अंतर्गत जयपुर  के 2500 स्कूली विद्यार्थियों को कवर कर चुके हैं, लेकिन इस सत्र ने स्पर्श के लिए सही मार्ग तैयार किया है।
युवा और अन्य टीम के सदस्य आने वाले दिनों में राजस्थान के लिए एक बेहतर मॉडल तैयार करने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि निजी और सरकारी दोनों स्कूलों ने अभियान में जबर्दस्त दिलचस्पी दिखाई है। अधिक से अधिक स्कूल और स्वयंसेवक भी आगे आने और इस पहल का हिस्सा बनने की इच्छा दिखा रहे हैं। हमें जो संदेश और अनुरोध मिल रहे हैं, जो अजमेर, बारां, श्रीगंगानगर, झुंझुनूं, पाली, उदयपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा, राजसमंद, कोटा, और बांसवाड़ा जैसे जिलों से है, वह इस बात का प्रमाण है कि जल्द ही राज्य के सभी 33 जिलों में ‘स्पर्श’ की भूमिका दिखाई देगी, जो न तो एनजीओ है और न ही सरकारी पहल। यह जिम्मेदार नागरिक रवैये का एक परिणाम है, जहां स्वयंसेवकों का झुकाव विशेष अभियान की ओर होता है।
चाइल्ड एब्यूज- गुड टच, बैड टच पहल की स्वयंसेवी प्रियंका कपूर ने कहा कि अन्य स्वयंसेवकों के साथ चौमूं के स्कूलों में 500 से अधिक बच्चों के साथ सत्र का आयोजन करते हुए मुझे लगा कि यह एक अनूठा अनुभव था जो दिल को छू गया। बच्चों की प्रतिक्रिया अद्भुत थी। बच्चों को गुड टच, बैड टच के बारे में पढ़ाना उस समय में बहुत महत्वपूर्ण होता है जब हम बच्चे के साथ दुर्व्यवहार और छेड़छाड़ के बारे में बहुत कुछ सुन रहे होते हैं। उन्होंने कहा कि गुड टच, बैड टच सेंसिटाइजेशन से ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।
स्वयंसेवक एवं इंडिया अमेरिका टुडे में परामर्श संपादक शिप्रा माथुर ने कहा पोस्को अधिनियम (यौन अपराधों से बच्चों का निवारण अधिनियम 2012) में वापस पारित हुआ, जिसका उद्देश्य पहली बार बच्चों के प्रति गैर-स्पर्श व्यवहार को विनियमित करना था, लेकिन इस तरह के कानून पर्याप्त रोकथाम नहीं कर पा रहे हैं इसलिए ‘स्पर्श’ जैसी पहल की आवश्यकता थी।
राज्य सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम से जुड़े ‘स्पर्श’ पहल के समन्वयक स्वयंसेवक विक्रम सिंह राघव कहते हैं, एक देश बुरे अनुभवों के नकारात्मक विचारों से नहीं बच सकता है। हमारा प्रयास एक जन अभियान बनने जा रहा है, विभिन्न जिलों के लोग और व्यक्ति हमारे साथ हाथ मिलाने के लिए उत्सुकता दिखा रहे हैं।

 

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